Aaj ka vachan 2

Aaj ka vachan 2 में आपका स्वागत है। परमेश्वर की सृष्टि में मनुष्य एक ऐसा प्राणी है, जो अपने मन की विचार को बातों के माध्यम से दूसरों को प्रकट कर सकता है। अन्यथा आप लोगों ने देखा ही होगा की गूंगो को किस प्रकार अपने मन की बात को दूसरों को प्रकट करने में दिक्कत होती है। पर आज हम मुंह की बातों में लोगों के जीवन के लिए हानि, लाभ तथा विपत्तियां भी छिपी रहती है, यह जानने की कोशिश करेंगे। यदि आप इस विषय के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो अन्त तक मेरे साथ बने रहिए।

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Aaj ka vachan 2

Aaj ka vachan 2 (नीतिवचन 21:23)

तो चलिए सबसे पहले नीतिवचन 21:23 की वचन को को पढ़ लेते हैं, “जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है।” दोस्तों मुंह से लोग अच्छे, बुरे, हानि लाभ, सुख दुख, और गाली जैसी बातों को भी निकालते हैं। वचन की माने तो फिजूल की बातें अपने मुख से नहीं बोलना चाहिए। अर्थात दूसरे को चोट लगने की जैसी बातें अपने मुंह से नहीं बोलना चाहिए। क्योंकि यदि कोई अपने मुंह को वश में न रखते हुए, अपशब्द और गाली, देने जैसी बातें कहता है, तो झगड़ा उत्पन्न होना स्वाभाविक है।

फिर लोगों के लिए सम्मान और अपमान बातों से ही होती है। इसलिए जो कोई अच्छी बात कहता है, वह सम्मान का अधिकारी बनता है। पर जो असम्मानजनक बातों का इस्तेमाल करता है, तो वह खुद के लिए, विरोधीयों को उत्पन्न करता है। अर्थात जो लोग असम्मानजनक बातें, गाली और अपशब्द बोलते हैं, खासकर वे अपने लिए विपत्तियां उत्पन्न करते हैं।

इसलिए नीतिवचन 10:19 कहता है, “जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है।”

अर्थात बिना मतलब के और बेवजह बातें करते रहने से अच्छा अपना मुंह को बंद रखना बुद्धिमानी का काम है। क्योंकि फिजूल की बातों और अत्याधिक चर्चा करने से झगड़ा उत्पन्न हो सकती है। फिर सामान्य झगड़ा बढ़कर मारपीट, हत्या और अपराध कर्म तक चला जाता है। इसलिए जहां फिजूल की बातों पर चर्चा होती रहती है, वहां से खुद को दूरी बनाए रखना चाहिए। क्योंकि मूर्ख लोग ही बेवजह से फिजूल की बातों के तर्क या वाद-विवाद में उलझते हैं।

इसलिए नीतिवचन 17:28 कि वचन को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि उसमें इस प्रकार लिखा है, “मूढ़ भी जब चुप रहता है, तब बुद्धिमान गिना जाता है; और जो अपना मुंह बन्द रखता वह समझ वाला गिना जाता है। क्या बात है। आप समझ रहे हैं न! वचन क्या कहता है। अर्थात फिजूल की बातें करने वाला मूर्ख व्यक्ति भी यदि लोगों के बीच में, झूठी विषय पर तर्क या वाद-विवाद होते समय चुप रहता है, तो वह समझदार गिना जाता है। इसलिए आप लोग भी झूठी तर्कों या वाद-विवाद से सदैव खुद को दूर रखा करें। इससे लोगों को कोई लाभ नहीं मिलता है: बल्कि हानि होती है।

इसलिए लोगों को बातें करते समय अपनी मुंह की चौकशी करना चाहिए। क्योंकि नीतिवचन 13:3 की वचन कहता है, “जो अपने मुंह की चौकसी करता है, वह अपने प्राण की रक्षा करता है, परन्तु जो गाल बजाता है उसका विनाश जो जाता है।”

इसलिए बातें करते समय सावधानी पूर्वक शब्दों का उच्चारण करें, जिससे आप सुनने वालों के सामने बुद्धिमान व्यक्ति साबित होंगे। आवश्यकता के अनुसार मधुर वाणी बोला करें और सुनने वालों के मन में हर्ष उत्पन्न करें। अन्यथा यदि आप ज्ञानी होने पर भी मूल्यहीन बातों के कारण मूर्ख गिने जाएंगे। फिर यदि आप लोगों के बीच में फूट उत्पन्न होने वाली बातें करते हैं, तो आपके विरोधियों की लिस्ट भी तैयार हो जाएंगी। इसलिए बोलते समय सोच समझकर बोला करें तो आपके लिए, बेहतर हो सकता है।

इसलिए लोगों को बोलते समय सावधानीपूर्वक बोलना चाहिए। क्योंकि भजन संहिता 34:13 की वचन कहता है, कि “अपनी जीभ को बुराई से रोके रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उससे छल की बात न निकले।” देखिए, अच्छी बातें बोलने के लिए परमेश्वर भी आपको नहीं रोकता है। पर मनुष्य के हित के विपरीत जो बात है, जिसे हम नुकसानदायक कहते हैं, उस प्रकार की बातों को बोलने के लिए बाइबल सख्त मना करती है। क्योंकि परमेश्वर कभी नहीं चाहते हैं, कि धार्मिक लोग बेवजह से फिजूल की तर्क या वाद-विवाद में उलझ कर अपना नुकसान कराएं। इसलिए परमेश्वर की वचनों को गहराई से समझने की कोशिश कीजिए।

निष्कर्ष

अंत में मैं यही कहना चाहूंगा, कि लोगों को हमेशा वाद-विवाद की बातों से दूरी बनाए रखना चाहिए। जहां भी झूठी बातों का वाद-विवाद होती रहती है, वहां से खुद को अलग रखना ही बेहतर है। क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति कभी नहीं चाहेगा कि झूठी बातों या फिजूल की बातों पर वाद-विवाद करके अपना नुकसान कराए। इसलिए समझदार और बुद्धिमान व्यक्ति बने। झूठी और फिजूल कि बातों की वाद-विवाद से खुद को अलग रखें। फिर पाप और अपराध को छोड़कर परमेश्वर के वचन के अनुसार जीवन गुजारें। प्रभु आपको बहुतायत से आशीष प्रदान करें। आपका दिन शुभ हो। धन्यवाद।।

प्रार्थना

Aaj ka vachan 2 के अनुसार प्रार्थना। भजन संहिता 141:3 की वचन के अनुसार प्रार्थना! “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर!” क्योंकि मैं एक नासमझ और मूर्ख आदमी हूं। लोगों के बीच में क्या बोलना है, और कैसे बोलना है, मुझे इसकी भी ज्ञान नहीं है। इसलिए मेरे होठों को स्पर्श कीजिए, और अच्छी बोलने की सामर्थ दीजिए, जिससे मैं आपकी महिमा कर सकूं। आपके पुत्र यीशु के नाम से मांगता हूं। आमीन।।

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