महिमा खुदी हुई मूरतों को न दूंगा

ईश्वर के प्रिय लोग; आपको प्रभु की ओर से आशीष मिलता रहे। आज हम जिस विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं; वह ईश्वर की महिमा के आधारित है। सब लोग ईश्वर की स्तुति और महिमा करते हैं। परंतु क्या वह ईश्वर की इच्छा के अनुसार होता है?

क्या कोई भी व्यक्ति ईश्वर की इच्छा के अनुसार उनकी महिमा करता है? लोग बहुत बार बाइबल को पढ़ और सुन चुके भी हैं। परंतु वचन और ईश्वर की इच्छा को समझने की कोशिश नहीं करते हैं। ऐसा क्यों होता है? आईए इसे जानने के लिए सबसे पहले वचन को पढ़ते हैं।

क्या मनुष्य ईश्वर की महिमा करता है?

तो आइए जानने कि कोशिश करते हैं; किस लिए ईश्वर को यह वचन कहना पड़ा; कि ⁸ मैं यहोवा हूं, मेरा नाम यही है; अपनी महिमा मैं दूसरे को न दूंगा और जो स्तुति मेरे योग्य है; वह खुदी हुई मूरतों को न दूंगा। यशायाह 42:8

दरअसल रोमियो 1:23 के वचन बताता है; की अविनाशी परमेश्वर की महिमा को लोग नाशमान मनुष्य, और पक्षियों, चौपायों, और रेंगने वाले जन्तुओं की मूरत की समानता में बदल डाला।

फिर यिर्मयाह 2:11 में लिखा है; परन्तु मेरी प्रजा ने अपनी महिमा को निकम्मी वस्तु से बदल दिया है।

यों उन्होंने अपनी महिमा अर्थात ईश्वर को घास खाने वाले बैल की प्रतिमा से बदल डाला। भजन संहिता 106:20

अर्थात निर्गमन 32 अध्याय में इसराइली लोग सोने की बछड़े का प्रतिमा बना कर उसकी पूजा की और ईश्वर को क्रोधित किया था।

इसलिए यिर्मयाह 16:20-21 वचन कहता है; ²⁰ क्या मनुष्य ईश्वरों को बनाए? नहीं, वे ईश्वर नहीं हो सकते!²¹ इस कारण, एक बार, मैं इन लोगों को अपना भुजबल और पराक्रम दिखाऊंगा, और वे जानेंगे कि मेरा नाम यहोवा है।

निर्गमन 20:4-6

प्रभु कहता है; ⁴ तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी कि प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है।

⁵ तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं;

⁶ और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करूणा किया करता हूं॥

ईश्वर की महिमा के बारे में जानकारी

महिमा किस प्रकार करना चाहिए? देखिए बाइबल में ईश्वर कहीं पर भी नही कहा है; की मेरा चित्र और प्रतीमा बनाओ। फिर भी लोग ईश्वर को अपना भक्ति और प्यार दिखाने के लिए खुदी हुई मूरतों और फोटो के आगे झुकते हैं। उन्हें यह भी नहीं पता है; की ईश्वर फोटो या मूरत में नहीं रहते हैं। इसलिए सावधान हो जाएं। क्योंकि ईश्वर नहीं चाहते; कि मनुष्य परमेश्वर को छोड़कर किसी भी प्रतीमा की महिमा करें। इस से ज्ञात होता है; कि ईश्वर अपनी महिमा किसीको भी नहीं देगा।

महिमा खुदी हुई मूरतों को न दूंगा
महिमा खुदी हुई मूरतों को न दूंगा

वचन से सावधान

क्योंकि व्यवस्थाविवरण 4:15-19 के वचन में लिखा है; ¹⁵ इसलिये तुम अपने विषय में बहुत सावधान रहना। क्योंकि जब यहोवा ने तुम से होरेब पर्वत पर आग के बीच में से बातें की तब तुम को कोई रूप न देख पड़ा; ¹⁶ कहीं ऐसा न हो कि तुम बिगड़कर चाहे पुरूष चाहे स्त्री के; ¹⁷ चाहे पृथ्वी पर चलने वाले किसी पशु; चाहे आकाश में उड़ने वाले किसी पक्षी के; ¹⁸ चाहे भूमि पर रेंगने वाले किसी जन्तु, चाहे पृथ्वी के जल में रहने वाली किसी मछली के रूप की कोई मूर्ति खोदकर बना लो;¹⁹ वा जब तुम आकाश की ओर आंखे उठा कर, सूर्य, चंद्रमा, और तारों को, अर्थात आकाश का सारा तारागण देखो, तब बहककर उन्हें दण्डवत करके उनकी सेवा करने लगो जिन को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने धरती पर के सब देश वालों के लिये रखा है।

चेतावनी

इसलिए बाइबल के परमेश्वर को मानने वाले लोग; वचन और आज्ञा का पालन करें। अगर मनुष्य का विरोधी मनुष्य हो तो चल भी सकता है। परन्तु मनुष्य का विरोधी ईश्वर हो तो समझिए सत्यानाश हो गया। इसलिए मनुष्य के द्वारा बनाई गई मूर्ति के आगे झुकना छोड़कर स्वर्ग की ओर अभिमुख होकर आत्मा से ईश्वर की आराधना करें।

यूहन्ना 4:23-24 में लिखा है; पिता ईश्वर आत्मा और सच्चाई से उपासना करने वाले सच्चे भक्तों को ढूंढता है। क्योंकि परमेश्वर आत्मा है। इसलिए महिमा पाने योग्य ईश्वर; (यहुदा 1:25) जो आदि में था; अब है; और भविष्य में भी सदा रहने वाले परमेश्वर की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।।

God bless you for reading to continue.

2 thoughts on “महिमा खुदी हुई मूरतों को न दूंगा”

Leave a Comment

Connect with me here
Connect with me here!
Connect with me here!