भजन संहिता 3 | hindi bible study

आज हम bible vachan में भजन संहिता 3 अध्याय पर चर्चा करेंगे। क्योंकि मनुष्य के जीवन की सुख दुख के जरिए से परमेश्वर लोगों के साथ वचन के माध्यम से बात करते हैं। भजन संहिता 3 की इस अध्याय खास करके राजा दाऊद अपने पुत्र अबशलोम के भय से भागते समय हुई पीड़ाओं को परमेश्वर के आगे बयां करने को दर्शाती है। यह सिर्फ राजा दाऊद की ही नहीं थी! बल्कि संसार में जीने वाले हर इंसान के लिए, परमेश्वर की ओर से एक शिक्षा है। यदि आप इसके बारे में जानना चाहते हैं तो थोड़ा धीरज से पढ़ने की कृपा करें।

भजन संहिता 3 :1

“हे यहोवा मेरे सताने वाले कितने बढ़ गए हैं! वह जो मेरे विरूद्ध उठते हैं बहुत हैं।”

भजन संहिता 3

देखिए हर कोई संकट के समय में परमेश्वर को पुकारता है। दाऊद के जीवन में भी अपने घर से ही, अपने पुत्र अबशलोम के रूप में एक संकट आई थी। तब (2 समूएल 15:14 ) की वचन के अनुसार राजा दाऊद अबशलोम के भय से अपने साथियों के साथ भाग रहा था। पर यहां एक सवाल उठता है, कि आखिर राजा दाऊद को अपने पुत्र अबशलोम के भय से क्यों भागना पड़ा था? दोस्तों इसका सही जवाब पाप है। हां दोस्तो आपने सही सुना है।

क्योंकि पाप के कारण ही राजा दाऊद को सिंहासन छोड़ कर भागना पड़ा था। ( 2 शमूएल 11) अध्याय बताती है, कि दाऊद ने हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी बेतशेबा के साथ व्यभिचार किया था। इतना ही नहीं, बल्कि राजा दाऊद ने हित्ती ऊरिय्याह को भी अम्मोनियों के साथ होने वाली युद्ध में, सबसे आगे रखने का आदेश सेनापति योआब को दे कर मरवा डाला था। यहां पर समझने वाली बात‌ यह है, कि परमेश्वर ने राजा दाऊद को सब कुछ दिया था। परंतु उसने अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल किया। वैसे ही आज भी लोग अपने धन और अधिकार का गलत इस्तेमाल करते हुए देखा जाता है।

पर ( 2 शमूएल 12 ) अध्याय में देखने को मिलता है, कि यहोवा परमेश्वर नबी नातान को भेज कर राजा दाऊद की पाप को स्मरण दिला कर कहते हैं, कि तू कुछ भी नहीं था, फिर भी मैंने तुझे इस्राएल के राज गद्दी पर बैठाया था। तूने हित्ती ऊरिय्याह को मरवा कर बतशेबा को अपने पत्नी बना के मेरी आज्ञाओं को तुझ जाना है। दोस्तों भजन संहिता 3 अध्याय लोगों को यह शिक्षा देते हैं, कि धन और अधिकार का दुरुपयोग पापों की कर्मों के लिए नहीं करना चाहिए।

यदि परमेश्वर अपने अभिशिक्त व्यक्ति राजा दाऊद को नहीं छोड़ा। तो आप और हम कौन खेत की मूली हैं। इसलिए लोग पाप और व्यभिचार से दूर रहें तो ही बेहतर हो सकता है। क्योंकि ( 1 कुरिन्थियो़ 6:18 ) की वचन कहता है, सभी पाप शरीर के बाहर होता है, पर व्यभिचार करने वाला व्यक्ति अपने शरीर के विरुद्ध ही पाप करता है।

इसलिए लोगों को सदैव व्यभिचार पाप से दूर रहना चाहिए। जिस तरह लोगों को प्रार्थना और धार्मिकता से जीवन जीने के बदौलत आशीष मिलती है। अर्थात जैसे लोग आशीष पाने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं। वैसे ही पाप करने से बिन मांगे ही स्राप मनुष्य के पास चला आता है। इसलिए ( भजन संहिता 3 :2 ) की वचन कहता है, की

भजन संहिता 3 :2

बहुत से मेरे प्राण के विषय में कहते हैं, कि उसका बचाव परमेश्वर की ओर से नहीं हो सकता।

पाप के कारण परमेश्वर का स्राप पड़ता है, और लोगों के जीवन में बहुत सी समस्या, संकट, बीमारी और विरोधी भी उत्पन्न हो जाते हैं। देखिए इस संसार में ऐसा कोई नहीं जो पाप नहीं किया है। क्योंकि ( रोमियो 3:23 ) की वचन कहता है, “इसलिये कि सब ने पाप किया है, और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं।” पाप करना कोई बहादुरी नहीं है। पर पश्चाताप करना, पाप को छोड़ना या मन फिराओ करना बहादुरी का काम है। देखिए दाऊद एक बार पाप किया था। उसके बाद जीवन भर और कोई पाप नहीं किया। क्योंकि दाऊद का एक पाप के कारण जंगल में दर-दर भटकने के साथ-साथ अपने पुत्र को भी खोना पड़ा।

अर्थात एक पाप के कारण दाऊद को बहुत कीमत चुकानी पड़ी थी। तो क्या आप भी पाप करेंगे। क्योंकि जब भी कोई परमेश्वर से प्रार्थना करता है, तो हाथ जोड़कर या तो हाथ उठा कर परमेश्वर के शरण में आता है। यूं कहे तो परमेश्वर के समीप सरेंडर हो जाता है। जिसे हम आत्मसमर्पण कहते हैं। इसका विपरीत जब भी कोई पाप करता है, आज्ञाओं को नहीं मानता है, वाचा को तोड़ता है, प्रभु को छोड़ता है, तो परमेश्वर क्रोधित हो कर उस मनुष्य के लिए अपना मुख छिपा लेते हैं।

क्योंकि ( व्यवस्थाविवरण 31:16-17 ) के वचन के अनुसार परमेश्वर जानते थे, कि मूसा के मरने के पश्चात इसराइली लोग बिगड़ कर परमेश्वर की उपासना करना छोड़ देंगे और दूसरे को ईश्वर मानकर पूजा करेंगे। जिसके चलते परमेश्वर का क्रोध भड़क उठेगा और वह अपना मुख छुपा लेने के वजह से इसराइली लोगों के ऊपर बहुत सारे संकट, बीमारी, समस्या उत्पन्न होगी। पर जो लोग राजा दाऊद की तरह संपूर्ण मन से पाप को छोड़कर प्रभु की ओर फिरते हैं, उन्हें क्षमा मिल जाता है। फिर परमेश्वर जिसको क्षमा करता है, उसे बचाता भी है। इसलिए ( भजन संहिता 3 :3-6 ) की वचन कहता है,

भजन संहिता 3
भजन संहिता 3

भजन संहिता 3 :3-6

परन्तु हे यहोवा, तू तो मेरे चारों ओर मेरी ढ़ाल है, तू मेरी महिमा और मेरे मस्तिष्क का ऊंचा करने वाला है। मैं ऊंचे शब्द से यहोवा को पुकारता हूं, और वह अपने पवित्र पर्वत पर से मुझे उत्तर देता है। मैं लेटकर सो गया; फिर जाग उठा, क्योंकि यहोवा मुझे सम्हालता है। मैं उन दस हजार मनुष्यों से नहीं डरता, जो मेरे विरूद्ध चारों ओर पांति बान्धे खड़े हैं।

अर्थात जो लोग पाप को सम्पूर्ण रीति से छोड़ते हैं, परमेश्वर उनके जीवन के लिए ढाल बनकर रहता है। परमेश्वर उनको ऊंचे स्थान पर बैठता है, और उनकी दुआओं को भी सुनता है। अर्थात जो लोग पाप को छोड़कर सच्चाई और ईमानदारी से जीवन जीते हैं, परमेश्वर उनकी सुनता है। परमेश्वर उनके साथ रहता है। वैसे लोग विपत्ति में, संकट, बीमारी या जीवन की किसी भी अनहोनी के समय में घबराते नहीं है। क्योंकि परमेश्वर जिसके साथ है, तो डरने की क्या बात है। इसलिए पाप को छोड़कर वही कीजिए जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है।

भजन संहिता 3 :7-8

उठ, हे यहोवा! हे मेरे परमेश्वर मुझे बचा ले! क्योंकि तू ने मेरे सब शत्रुओं के जबड़ों पर मारा है और तू ने दुष्टों के दांत तोड़ डाले हैं। उद्धार यहोवा ही की ओर से होता है; हे यहोवा तेरी आशीष तेरी प्रजा पर हो।

यहां पर लोगों को समझने की जरूरत है कि उद्धारकर्ता परमेश्वर प्रभु यीशु हैं। क्योंकि (यशायाह 43:11) की वचन में परमेश्वर कहते हैं, कि मैं ही उद्धारकर्ता हुं। फिर (लूका 2:11) की वचन प्रभु यीशु को उद्धारकर्ता कहता है। क्योंकि परमेश्वर लोगों की अपराध क्षमा करता है। संकट विपत्तियों से बचाता है। सच्चे मन से प्रार्थना करने वालों को आशीष प्रदान करता है। इसलिए लोगों पाप से बचने के लिए ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष

यदि आप बाइबल पढ़ते हैं, वचन को सुनते हैं, प्रार्थना भी करते हैं। तो नादान बच्चों की तरह न बने! बल्कि बुद्धिमान व्यक्ति की तरह, पाप को छोड़कर, अपने दैनिक जीवन में भी परमेश्वर की इच्छा के अनुसार जीएं। क्योंकि यदि कोई मसीह कहलाने वाले व्यक्ति प्रभु यीशु की शिक्षाओं को नहीं मानता है, और पाप में जीवन जीता है, तो वह उस धोबी की तरह है, जो कपड़े तो धोता है, पर उस कपड़े को अपने पास रख नहीं पाता है।

ठीक वैसे ही प्रभु के लोग कहलाने वाले व्यक्ति यदि प्रभु की उपासना दिन रात करता है, पर पाप को नहीं छोड़ता है, तो उसे क्या लाभ मिलेगा। क्योंकि प्रभु उसके साथ नहीं रहेगा। दोस्तों मैं उम्मीद करता हूं कि भजन संहिता 3 अध्याय की वचन आपको समझ में आ गया होगा। यदि वचन आपको अच्छा लगा हो तो comment जरूर कीजिएगा। प्रभु के वचन के प्रति कीमती समय देने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। प्रभु आप को सुरक्षित रखें आपका दिन शुभ हो।

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