प्रभु का वचन unique है, इसका प्रमाण भी वचन से ही मिलता है। क्योंकि यादें मिट जाती है, कपड़ा पुरानी हो जाती है, घास सूख जाती है, फूल मूर्झा जाता है, परन्तु (यशायाह 40:8) कहता है, हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा।
प्रभु का वचन को भविष्यद्वक्ता, पास्टर, बिशप या कोई भी मनुष्य दूसरों से चुराकर अथवा Copy करके नहीं बोलना चाहिए, क्योंकि (यिर्मयाह 23:30) वचन के अनुसार परमेश्वर उस व्यक्ति का खिलाफ हो जाता है। कारण की प्रभु का वचन सदा सर्वदा unique है, unique था और रहेगा। अगर आप जानना चाहते हैं, कि प्रभु का वचन unique क्यों रहता है; तो इस विषय को पढ़ने की जरूर कष्ट करें। मुझे उम्मीद है, कि आपकी मन की जिज्ञासा का समाधान प्रभु का वचन के द्वारा मिल सकता है।
प्रभु का वचन unique होने का कारण क्या है?
एक बात मैं आपको स्मरण करा देना चाहता हूं, जब भी आप कोई जान पहचान वाले व्यक्ति, सगे संबंधी या दोस्तों से मिलते हैं; तो आप उसकी कुशल खेम पूछते हैं, भाई कैसे हो? ठीक-ठाक हो या नहीं? फिर आप दैनंदिन जीवन की बातें तथा अपने बीते दिनों की देखी हुई घटनाओं के बारे में चर्चा करने लगते हैं। क्योंकि मनुष्य सांसारिक होने के नाते संसार की ही बातें करता है। इसलिए (यूहन्ना 3:31) कहता है जो पृथ्वी का है, वह पृथ्वी की बातें करता है और जो उपर से आता है, वह सर्वोत्तम तथा सब से ऊपर है। क्योंकि प्रभु का वचन ऊपर से आता है, इसलिए वह सर्वोत्तम और unique है।
क्या प्रभु का वचन को हम इंसानों के लिए समझना आसान है?
देखिए प्रभु का वचन रहस्य से भरा हुआ है। जिस व्यक्ति को वचन की भेद को समझने और समझाने की सामर्थ दी गई है वही उसका अर्थ समझा सकता है। तथा जो व्यक्ति ध्यान पूर्वक वचन को पढ़ कर उसकी मनन चिन्तन करने से समझने में आसान हो सकता है। क्योंकि खुद प्रभु यीशु दृष्टान्त के द्वारा लोगों को स्वर्ग राज्य के भेद के बारे में समझाते थे। क्योंकि जब चेलों ने आकर (मत्ती 13:10-11) के वचन में दृष्टांत के विषय में प्रभु को पूछने से उनका जवाब यह था, की चेलों को तो स्वर्ग राज्य की भेद के बारे में जानने की सामर्थ दी गई है; परंतु लोगों को नहीं।
- क्योंकि (मत्ती 13:13-15) में प्रभु का वचन कहता है, कि लोग देखते हुए भी नहीं देखते और सुनते हुए भी नहीं समझते हैं। क्या आप समझ सकते हैं, कि इसका कारण क्या हो सकता है? क्योंकि प्रभु यीशु कहते हैं; कि लोगों का मन मोटा हो गया है, इसलिए वे ऊंचा सुनते हैं। देखिए प्रभु का वचन को सिर्फ कानों से ही नहीं; बल्कि समझने के लिए मन से भी सुनना पड़ता है। अन्यथा समझने में दिक्कत हो सकती है।
क्या परमेश्वर की वचन का भेद बताने के लिए पवित्र आत्मा का प्रकाश मिलता है?
बिल्कुल सही है, क्योंकि यह (इफिसियों 3:2-5) की वचन से पता चलता है, की पौलुस को पवित्र आत्मा का प्रकाश मिला था, जिसे वह खुद समझ कर दूसरों को अच्छी तरह समझा सके। फिर आप पूछेंगे, कि क्या सभी पास्टर, विशप,भविश्यद्वक्ता और प्ररितों को सुसमाचार का भेद बताने के लिए प्रकाश मिलता है? जी हां बिल्कुल मिलता है। परंतु कुछ प्रभु का वचन ऐसी है, जिसे समझना कठिन लगता है, (2 पतरस 3:16) उसे बढ़ा चढ़ाकर या खींचतान कर नहीं बोलना चाहिए। वरना खुद नाश का कारण भी हो सकते हैं। (भजन संहिता 56:5) के अनुसार वचन का उल्टा अर्थ लगा लगाकर उसे नहीं मरोड़ना चाहिए।
निष्कर्ष
प्रभु का वचन की इस विषय को लिखने का मेरा तात्पर्य यह है, की ईश्वर हमेशा से ही unique था, है और रहेगा। इसलिए उसका वचन भी unique है। पर यह सुनाने वालों के ऊपर निर्भर करता है, की वे प्रभु का वचन की अर्थ को प्रभु की आत्मा की सहायता से बोलते हैं, या तोड़ मरोड़ कर वचन की गलत अर्थ लोगों को बताते हैं।
क्योंकि (1 यूहन्ना 4:1) कि वचन कहता है, सभी आत्मा को विश्वास न करो, पर उसको परखो कि वह परमेश्वर की ओर से है कि नहीं। क्योंकि जो परमेश्वर की ओर से है वह प्रभु का वचन के आधार पर ही बात करेगा। मैं आशा करता हूं, की आप के मन में उठने वाले कुछ प्रश्न का समाधान जरूर मिल गया होगा। अच्छा लगे तो comment और share जरूर करना। धन्यवाद।।
Hallelujah thank-you Jesus..
Jo mujhe samarth detaa h usmme mai sab kuch kar saktaa hun… Amen.
Thank you Jesus ❤