पाप क्षमा के लिए प्रार्थना

दरअसल किसी व्यक्ति का पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करना एक आत्मिक परिवर्तन हो सकता है। क्योंकि जब भी किसी व्यक्ति को अपने ग़लती का एहसास होता है, तब वह खुद ब खुद परमेश्वर से अपने पाप के लिए क्षमा मांगता है। फिर पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने से मनुष्य को अपने अशांत अंतरात्मा में शान्ति मिलती है। तो प्रभु के प्रियजनों आज हम बाइबल के वचन पर आधारित पाप क्षमा के लिए प्रार्थना की जानकारी देने वाले हैं। यदि आप खुद की आत्मिक उन्नति चाहते हैं, तो इस विषय पर गौर जरूर फरमाइएगा।

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पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने का वचन

पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने का वचन बोलने से पहले एक बात बता देना चाहता हूं, की उत्पत्ति 2:7 में वचन कहता है, कि परमेश्वर ने मनुष्य को भूमि की मिट्टी से बनाया। पर उस मिट्टी के मनुष्य अर्थात हम सब अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर की इच्छा और आज्ञा के विपरित चलकर बारम्बार पाप करते रहते हैं। तत्पश्चात जब परिवार में अशांति, समस्या और बिमारी की हालत उत्पन्न होती है, तो हमें खुद के जीवन की एक एक पाप के बारे में झांकने के बजाय इसे एक आम घटना समझकर एक दूसरे से इसकी चर्चा करते रहते हैं,

की भाई कैसी समस्या है, यह घटना कैसे घटी, बिमारी का कारण क्या है? रहन सहन, खान पान में कोई तृटिपूर्ण थी क्या? पर यह कोई नहीं पूछता है, कि भाई साहब क्या आप पाप करके परमेश्वर को दुःख दिए हैं? क्योंकि ऐसे सवाल सुनकर उस व्यक्ति नाराज हो सकता है। और ऐसे सवाल करना भी ठीक नहीं है? क्योंकि रोमियो 3:23 में वचन कहता है, कि सबने पाप किया है। इसलिए परमेश्वर के सम्मुख अपने पापों के लिए पश्चाताप करते हुए, दूसरों को भी पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने की सलाह जरूर देना चाहिए।

यद्यपि आप अपने जीवन के बुरे दिन, अर्थात संकट, समस्या और बिमारी के समय में जब भी पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करते हैं, तो इस प्रार्थना के वचन को बार बार दोहरा दोहरा कर पढ़ते रहिए। हो सकता है, आपकी प्रार्थना सुनकर परमेश्वर का क्रोध शांत हो जाए, और वह फिर कर दंड के बदले आपको आशीष दे दे। तो चलिए इस वचन को बार बार दोहरा दोहरा कर पढ़ते रहिए। क्योंकि यिर्मयाह 14:19-21की वचन में इस प्रकार लिखा है। आप यहूदा के जगह पर अपना देश, शहर, गांव और खुद का नाम लेकर प्रार्थना कर सकते हैं।

“क्या तू ने ((यहूदा)) से बिलकुल हाथ उठा लिया? क्या तू सिय्योन से घिन करता है? नहीं, तू ने क्यों हम को ऐसा मारा है कि हम चंगे हो ही नहीं सकते? हम शान्ति की बाट जोहते रहे, तौभी कुछ कल्याण नहीं हुआ; और यद्यपि हम अच्छे हो जाने की आशा करते रहे, तौभी घबराना ही पड़ा है। हे यहोवा, हम अपनी दुष्टता और अपने पुरखाओं के अधर्म को भी मान लेते हैं, क्योंकि हम ने तेरे विरुद्ध पाप किया है। अपने नाम के निमित्त हमें न ठुकरा; अपने तेजोमय सिंहासन का अपमान न कर; जो वाचा तू ने हमारे साथ बान्धी, उसे स्मरण कर और उसे न तोड़।”

परमेश्वर प्रार्थना सुनते हैं

यदि कोई अपने बुरे दिन में, दुख के समय में, संकट की घड़ी में और बीमारी के हालत में परमेश्वर से प्रार्थना करता है, तो वह अवश्य प्रार्थना को सुनकर पाप क्षमा करते हैं। क्योंकि 2 इतिहास 7:13-14 की वचन में इस प्रकार लिखा है, कि यदि मैं आकाश को ऐसा बन्द करूं, कि वर्षा न हो, वा टिडियों को देश उजाड़ने की आज्ञा दूं, वा अपनी प्रजा में मरी फैलाऊं, तब यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन हो कर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी हो कर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुन कर उनका पाप क्षमा करूंगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूंगा।

अर्थात यदि कोई संकट के समय, दुःख और बिमारी के घड़ी में, अकाल और महामारी के समय में, अपनी बुरी चाल चलन बदल कर, पाप गुनाहों को छोड़कर परमेश्वर पर मन लगा कर, तथा दीन बन कर प्रार्थना करता है, तो स्वर्ग का परमेश्वर कह रहे हैं, कि वह निश्चित रूप से पाप क्षमा करेंगे और उसके जीवन में, देश में, नगर में, गांव में, परिवार में खुशियां और शान्ति पुनः प्रदान करेंगे।

तो परमेश्वर के प्रियजनों संकट को अपने पास आने मत दिजिए, बुरे वक्त आने से पहले ही नम्र बन जाईए, पाप क्षमा के लिए प्रार्थना किजिए और अपनी बुरी चाल चलन तथा पाप गुनाहों को छोड़कर परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले कामों को करने का प्रयास करते रहिए।

पाप क्षमा के लिए प्रार्थना
पाप क्षमा के लिए प्रार्थना

दानिय्येल की तरह प्रार्थना

पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने से पहले दानिय्येल 9 अध्याय की वचन को जरूर पढ़ लेना चाहिए। क्योंकि हम सब मनुष्य बड़े अधर्मी और नासमझ होते हैं। अर्थात परमेश्वर के वचन की शिक्षा और आज्ञा को हमेशा अनसुना करके नजरअंदाज करते रहते हैं। पर गंदी बातें और बुराई की चर्चा को ध्यान पूर्वक सुनने लग जाते हैं। इस तरह हम मनुष्य जाने अंजाने में बार बार न चाहते हुए भी, पाप के चंगुल में फंसकर परमेश्वर के विरुद्ध चले जाते हैं।

बन्धुआई के समय ईस्राएलियों को भी अपने देश से बाहर हो कर, बहुत दुःख उठाते हुए, निर्वासित जीवन गुजारना पड़ता था। पर दानिय्येल ने शास्त्र का अध्ययन करके इसका कारण जानने की कोशिश किया। दानिय्येल को शास्त्र का अध्ययन करके पता चलता है, कि बन्धुआई में ले जाने का प्रमुख कारण पाप है। क्योंकि मूसा के व्यवस्था में परमेश्वर ने लोगों को पहले से ही आज्ञा और नियम को मानने की चेतावनी दी थी। कहते हैं न कि जब मनुष्य के पास सब चीजों की भरमार होती है, तो घमंडी बनकर बेवजह पाप को गले लगाकर अपनी विनाश को दावत देते रहते हैं। ईस्राएलियों ने भी अपने परमेश्वर को त्यागकर पाप किया था।

पर दानिय्येल ने देखा कि पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने के अलावा परमेश्वर के क्रोध की ज्वाला से बचने का और कोई दूसरा विकल्प नहीं है। इसलिए उसने गिड़गिड़ाते हुए परमेश्वर से इस प्रकार प्रार्थना करता है। क्योंकि दानिय्येल 9:3-20 वचन में इस प्रकार लिखा है।

तब मैं अपना मुख परमेश्वर की ओर कर के गिड़गिड़ाहट के साथ प्रार्थना करने लगा, और उपवास कर, टाट पहिन, राख में बैठ कर वरदान मांगने लगा। मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा से इस प्रकार प्रार्थना की और पाप का अंगीकार किया, हे प्रभु, तू महान और भययोग्य परमेश्वर है, जो अपने प्रेम रखने और आज्ञा मानने वालों के साथ अपनी वाचा को पूरा करता और करूणा करता रहता है,

हम लोगों ने तो पाप, कुटिलता, दुष्टता और बलवा किया है, और तेरी आज्ञाओं और नियमों को तोड़ दिया है। और तेरे जो दास नबी लोग, हमारे राजाओं, हाकिमों, पूर्वजों और सब साधारण लोगों से तेरे नाम से बातें करते थे, उनकी हम ने नहीं सुनी।

हे प्रभु, तू धर्मी है, परन्तु हम लोगों को आज के दिन लज्जित होना पड़ता है, अर्थात यरूशलेम के निवासी आदि सब यहूदी, क्या समीप क्या दूर के सब इस्राएली लोग जिन्हें तू ने उस विश्वासघात के कारण जो उन्होंने तेरा किया था, देश देश में बरबस कर दिया है, उन सभों को लज्जित होना पड़ता है। हे यहोवा हम लोगों ने अपने राजाओं, हाकिमों और पूर्वजों समेत तेरे विरुद्ध पाप किया है, इस कारण हम को लज्जित होना पड़ता है।

परन्तु, यद्यपि हम अपने परमेश्वर प्रभु से फिर गए, तौभी तू दयासागर और क्षमा की खानि है। हम तो अपने परमेश्वर यहोवा की शिक्षा सुनने पर भी उस पर नहीं चले जो उसने अपने दास नबियों से हम को सुनाईं। वरन सब इस्राएलियों ने तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया, और ऐसे हट गए कि तेरी नहीं सुनी। इस कारण जिस शाप की चर्चा परमेश्वर के दास मूसा की व्यवस्था में लिखी हुई है, वह शाप हम पर घट गया, क्योंकि हम ने उसके विरुद्ध पाप किया है।

सो उसने हमारे और न्यायियों के विषय जो वचन कहे थे, उन्हें हम पर यह बड़ी विपत्ति डालकर पूरा किया है; यहां तक कि जैसी विपत्ति यरूशलेम पर पड़ी है, वैसी सारी धरती पर और कहीं नहीं पड़ी। जैसे मूसा की व्यवस्था में लिखा है, वैसे ही यह सारी विपत्ति हम पर आ पड़ी है, तौभी हम अपने परमेश्वर यहोवा को मनाने के लिये न तो अपने अधर्म के कामों से फिरे, और न तेरी सत्य बातों पर ध्यान दिया।

इस कारण यहोवा ने सोच विचार कर हम पर विपत्ति डाली है; क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा जितने काम करता है उन सभों में धर्मी ठहरता है; परन्तु हम ने उसकी नहीं सुनी। और अब, हे हमारे परमेश्वर, हे प्रभु, तू ने अपनी प्रजा को मिस्र देश से, बली हाथ के द्वारा निकाल लाकर अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जो आज तक प्रसिद्ध है, परन्तु हम ने पाप किया है और दुष्टता ही की है।

हे प्रभु, हमारे पापों और हमारे पुरखाओं के अधर्म के कामों के कारण यरूशलेम की और तेरी प्रजा की, और हमारे आस पास के सब लोगों की ओर से नामधराई हो रही है; तौभी तू अपने सब धर्म के कामों के कारण अपना क्रोध और जलजलाहट अपने नगर यरूशलेम पर से उतार दे, जो तेरे पवित्र पर्वत पर बसा है। हे हमारे परमेश्वर, अपने दास की प्रार्थना और गिड़गड़ाहट सुनकर, अपने उजड़े हुए पवित्र स्थान पर अपने मुख का प्रकाश चमका; हे प्रभु, अपने नाम के निमित्त यह कर।

हे मेरे परमेश्वर, कान लगाकर सुन, आंख खोल कर हमारी उजड़ी हुई दशा और उस नगर को भी देख जो तेरा कहलाता है; क्योंकि हम जो तेरे साम्हने गिड़गिड़ाकर प्रार्थना करते हैं, सो अपने धर्म के कामों पर नहीं, वरन तेरी बड़ी दया ही के कामों पर भरोसा रख कर करते हैं। हे प्रभु, सुन ले; हे प्रभु, पाप क्षमा कर; हे प्रभु, ध्यान देकर जो करता है उसे कर, विलम्ब न कर; हे मेरे परमेश्वर, तेरा नगर और तेरी प्रजा तेरी ही कहलाती है; इसलिये अपने नाम के निमित्त ऐसा ही कर।

इस प्रकार मैं प्रार्थना करता, और अपने और अपने इस्राएली जाति भाइयों के पाप का अंगीकार करता हुआ, अपने परमेश्वर यहोवा के सम्मुख उसके पवित्र पर्वत के लिये गिड़गिड़ाकर बिनती करता ही था।

निष्कर्ष

परमेश्वर के प्रियजनों चाहे इस वक्त आपके जीवन में जैसी भी परिस्थितियां क्यों न हो एक बात का सदैव स्मरण रखना कि इस संसार में कोई भी धर्मी नहीं है। इसलिए हमेशा अपने पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करते रहना चाहिए। क्योंकि हमने पहले से ही रोमियो 3:23 की वचन को बता दिया है, कि सबने पाप किया है। इसका मतलब सब कोई जाने अंजाने से पाप में गिर जाते हैं। फिर परमेश्वर के ओर से मिलने वाली कृपा दान से वंचित रह जाते हैं। एक बात मैं पुछना चाहता हूं, कि क्या आपके निजी जीवन, घर और परिवार में समस्या, बिमारी, संकट, काम में रुकावट तथा अशांति लगा रहता है।

तो दानिय्येल की तरह गिड़गिड़ाकर अपने पाप का अंगीकार करते हुए प्रार्थना किजिए। जैसे एक बच्चा अपने मातापिता को किसी चीज मांगते वक्त मनवाने के लिए रो पड़ती है। ध्यान रहे आपकी प्रार्थना भी वैसा ही होना चाहिए। देखिएगा परमेश्वर आपकी प्रार्थना को स्वीकार करने में देर नहीं करेंगे। मैं आशा करता हूं, कि पाप क्षमा के लिए प्रार्थना करने की शिक्षा से आपके जीवन में नई कृपा दान प्राप्त हो सकती है। परमेश्वर आपको बहुतायत से आशीष प्रदान करें और आपका जीवन के राह मंगलमय हो। प्रभु के वचन के प्रति मूल्यवान समय देने के लिए धन्यवाद।। Praise the lord. Hallelujah.

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