धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है

धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा; जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है। याकूब 1:12

परीक्षा के बारे में जानने के लिए; इसे दो भाग में बांटना पड़ेगा। क्योंकि बाइबल के अनुसार परीक्षा दो प्रकार का होता है।

1 उन्नति

2 अवनति

1 उन्नति। धन्य है वह मनुष्य

धन्य है वह मनुष्य इब्राहिम जिसने (उत्पत्ति 22:1-2) के वचन के अनुसार ईश्वर की परीक्षा में स्थिर रहा। इसके फलस्वरूप आशीर्वाद का अधिकारी हुआ।

(व्यवस्थाविवरण 8:2 और 8:16) का वचन के अनुसार; ईश्वर इसलिए परीक्षा लेता है; कि लोगों को नम्र बनाएं और उनका भला करे।

(न्यायियों 2:22 और 3:4) के वचन में लिखा है; ईश्वर की परीक्षा इसलिए भी होता है; की लोग ईश्वर की आज्ञा और उनका दिखाया हुआ मार्ग पर चलते हैं; या नहीं।धन्य है वह मनुष्य इसलिए कहा गया है; इसका मतलब जब भी किसी व्यक्ति का परीक्षा हो और वह धीरज बना रहे; तो उसका भला हो सकता है।

ईश्वर की ओर से परीक्षा होने का एक संकेत यह है; कि जब कोई व्यक्ति ईमानदारी से काम करता है; और उसकी इमानदारी और सच्चाई पर सवाल उठता है! क्योंकि परीक्षा होने वाला व्यक्ति को ही पता रहता है; की वह ईमानदार है या नहीं। अच्छे आदमी की परीक्षा इसलिए होता है; कि वह और भी अच्छा बने। परंतु जिन लोगों को बाइबल के इन वचनों का ज्ञान नहीं है; वे यूं ही टूट जाते हैं; और कहते हैं; की मैं तो अच्छा आदमी हूं; फिर भी मुझ पर ही शक किया जाता है। और वह व्यक्ति परीक्षा के समय डगमगा जाता है।

धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है
धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है

2 अवनति

(मत्ती 4:1-11) के वचन में अवनति की परीक्षा से बचने के लिए; यीशु 3 उदाहरण दिए हैं। भूख के समय में धीरज रहना चाहिए; अपना बड़प्पन दुसरों को न दिखाएं और अधिकार (सत्ता; शक्ति) को पाने के लिए लालसा न करें। मनुष्य पतन के निमित्त होने वाले परीक्षा के लिए खुद ही उत्तरदाई है।

(1 तीमुथियुस 6:9) अत्यधिक धन प्राप्ति की अभिलाषा; खाने पीने का मोह; हैं शारीरिक अभिलाषा अर्थात सीधी सी बात कहा जाए तो; किसी भी चीज की अत्याधिक लालसा करना ही मनुष्य के लिए; पतन का कारण बन जाता है। और वह पाप में गिर कर अपना सब कुछ खो देता है।बुरी चीजें और बुरी बातों के लिए ईश्वर की ओर से परीक्षा नहीं होता है; क्योंकि मनुष्य अपने ही अभिलाषाओं में फंसकर परीक्षाओं में पड़ता है।

(याकूब 1:13-14)अगर आप भी ईश्वर की दृष्टि में धन्य बने रहना चाहते हैं; तो परीक्षा के समय में धीरज बने रहें। और अगर यह भी चाहते हैं; कि आपकी परीक्षा ना हो; तो जागते रहें और प्रार्थना करें।

(मरकुस 14:38)क्योंकि ईश्वर भक्तों को परीक्षा से निकलता है; और अधर्मीयों को न्याय के दिन तक दंड की दशा में रखना भी जानता है।

Conclusion

(2 पतरस 2:9) अगर आप ईश्वर से; धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; सुनना चाहते हैं; तो धीरज के वचनों को थामे रहें।

(प्रकाशित वाक्य 3:10) जिससे पृथ्वी पर रहने वालों को परखने के लिए संसार में आने वाला है; उस समय ईश्वर आपको बचा के रखेगा।

God bless you for reading to continue.

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