आज का वचन: Today and future no.1

जग जाहिर है, कि सारी सृष्टि के अधिपति परमेश्वर के दिव्य वचन को, आजकल लोग आज का वचन के रूप में google, youtube और किसी भी platform पर search करते हैं। पर आज का वचन को लोग क्यों search करते हैं? और यह लोगों के लिए इतनी अहमियत क्यों है? अगर आप के मन में परमेश्वर का वचन के बारे में अधिक जानने की जिज्ञासा हो, तो आज का वचन को सम्पूर्ण पढ़ने की कष्ट करें। क्योंकि आधा-अधूरा ज्ञान मनुष्य की सफलता में बाधा उत्पन्न करती है।

आज का वचन को लोग क्यों search करते हैं?

मनुष्य कभी नहीं जानता कि पल भर के बाद उसके जीवन में क्या घटित होने वाला है, इसलिए यह उचित भी है, कि परमेश्वर की वचन को पढ़ने पे अपना मन लगाएं। दरअसल वर्तमान के समय में लोगों को(1) काम में सफलता, (2) जीवन में सुरक्षा, (3) खुशहाल जिंदगी की कामना और (4) भविष्य में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की पहचान चाहिए। इसलिए लोग बाइबिल में आज का वचन को search करते हैं।

  • (1) काम में सफलताा
  • लोग अपने-अपने काम में सफलता पाने के लिए, बाइबल में वचन को search करते हैं। परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं; और कहते हैं, हे प्रभु, परमेश्वर जिस काम को मैं करने जा रहा हूं, उसमें मुझे सफलता प्रदान कर। पर सफलता ऐसे ही नहीं मिलती है। उसके लिए यूसुफ की तरह बनना पड़ेगा। क्योंकि ईश्वर यूसुफ के साथ था और वह जो कुछ करता था उसमें उसे सफलता मिलती थी। (उत्पत्ति 39:23) यहां पर सवाल उठता है; की आखिर यूसुफ के साथ ईश्वर क्यों रहता था? क्योंकि वह सच्चाई और खराई से चलने वाला इंसान था।
  • यह न सोचें कि यूसुफ का जीवन में तकलीफ नहीं था। वह बचपन में ही अपने भाईयों के द्वारा प्रताड़ित किया गया और उसे उन्होंने मिस्र देश में बेच दिया। इस तरह उसे घर से बेघर होना पड़ा। इस से अधिक दुखदाई क्या हो सकता है? परन्तु परमेश्वर ने उसके साथ रहा और प्रत्येक काम में सफलता प्रदान किया। यहां तक कि अन्त में वह मिस्र देश का प्रधानमंत्री भी बन गया। (उत्पत्ति 41:43) क्योंकि परमेश्वर का आत्मा यूसुफ के अंदर रहता था।
  • (2) जीवन में सुरक्षा
  • सुरक्षा एक ऐसा मुद्दा है, जिसे लेकर सभी लोग चिंतित रहते हैं। क्योंकि कोई भी मनुष्य नहीं चाहता कि वह और अपना परिवार असुरक्षित महसूस करता रहे। शारीरिक असुरक्षा, ( जैसे कि बिमारी, संकट, समस्या) आर्थिक असुरक्षा, (धन संबंधी नुकसान), प्राकृतिक समस्या, या यूं कहें तो इस प्रकार की बहुत सारे घटना मनुष्य के जीवन में घटती रहती है। परन्तु आज मनुष्य भी एक कदम आगे चलकर अपना सुरक्षा का इंतजाम करने में कोई चूक नहीं करता है। इसके वाबजूद भी यदि कोई अनहोनी हो जाती है, तो लोग अपना भाग्य पर दोष लगाने में लग जाते हैं।
  • परन्तु आज का वचन में मै सुरक्षा के बारे में तीन बात पर जोर डालना चाहता हूं,
  • (i) परमेश्वर की मर्जी हो तो मनुष्य सुरक्षित रह सकता है।
  • जैसे कि ( उत्पत्ति 28:15) के वचन में परमेश्वर याकूब से कहता है, तु जहां कहीं भी जाएं, मैं तेरे साथ रह कर, तेरी रक्षा करुंगा। यहां पर परमेश्वर अपनी योजना को पूरा करने के लिए याकूब को रक्षा करने का वचन देता है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को परमेश्वर की योजना क्या है, जानने की कोशिश करने के साथ-साथ ईश्वर की मर्जी के अनुसार चलना चाहिए।
  • कोई-कोई ज्ञानी लोग पूछ लेते हैं, कि परमेश्वर की मर्जी या इच्छा क्या है? (1 थिस्सलुनीकियों 4:3) की वचन को देखें तो, परमेश्वर की इच्छा यह है, कि लोग पवित्र जीवन जिएं। पाप और व्यभिचार से दूर रहें। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलें। क्योंकि (यूहन्ना 14:6) में प्रभु यीशु स्वयं कहते हैं, की मार्ग, सत्य और जीवन मैं ही हूं। परन्तु यदि कोई व्यक्ति पाप और गुनाह में लिप्त रह कर परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध चलता है, तब वह परमेश्वर की सुरक्षा क्षेत्र से बाहर हो जाता है। इसलिए (इफिसियों 5:17) का वचन कहता है, कि निर्बुद्धि न हो कर प्रभु की इच्छा क्या है, समझने की कोशिश करना चाहिए।
  • (ii) प्रार्थना
  • प्रार्थना के द्वारा एक व्यक्ति अपनी सुरक्षा को निश्चित कर सकता है। सच्चे मन से की जाने वाली प्रार्थना मृत्यु को भी रोक देती है। बाइबल के वचन को देखा जाए तो, लोगों को राजा हिजकिय्याह की तरह प्रार्थना करना चाहिए। (यशायाह 38:1-8) राजा हिजकिय्याह का मृत्यु की घोषणा परमेश्वर ने कर दिया था । परन्तु उस समय उसने बिलख बिलख कर रोया और आंसू बहा कर प्रार्थना की। फलस्वरूप परमेश्वर उसकी प्रार्थना को सुनते हैं; और उसकी मृत्यु टाल कर 15 वर्ष तक आयु बढ़ा देते हैं। इस से यह मालूम होता है; की लोगों को निरन्तर परमेश्वर से प्रार्थना करते रहना चाहिए। क्योंकि प्रार्थना, मनुष्य की चारों और उत्पन्न होने वाली नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
  • (iii) पाप
  • पाप मनुष्य को असुरक्षित बना देती है। क्योंकि (रोमियो 6:23) कहता है, पाप की मजदुरी मृत्यु है। परन्तु परमेश्वर का वरदान यीशु मसीह में अर्थात सत्य पर चलने से अनन्त जीवन मिलता है। संसार में जन्म लेने वाले सभी प्राणियों की शारीरिक मृत्यु होना अवश्य तय है। पर जब मनुष्य अपने आप को सबसे बुद्धिमान प्राणी समझता है, तो क्यूं बेवजह पाप करके संकट, समस्या, विपत्ति, बिमारी और मृत्यु को असमय अपने गले लगाना चाहेगा। समझदारी इसी में है, कि पाप को छोड़कर सत्य पर चलने के लिए हर संभव प्रयास करते रहना चाहिए।
आज का वचन
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  • (3) खुशहाल जिंदगी की कामना
  • कौन ऐसा मूर्ख है? किसे खुशहाल जिंदगी नहीं चाहिए? दोस्तों हर कोई खुशी से रहना चाहता है। दुःख में रहना किसी को भी पसंद नहीं है। हां; कोई-कोई लोग बाइबल खोलकर यह जरूर सोचते हैं, आज का वचन हमें खुशी के बारे में पढ़ना चाहिए। परन्तु (भजन संहिता 105:3-4) के अनुसार लोगों को परमेश्वर की महिमा करनी चाहिए, क्योंकि लिखा है, जो कोई परमेश्वर यहोवा को ढूंढता है, उनका हृदय आनन्दित होता है। इसलिए प्रभु की सामर्थ को खोजो और उसकी दर्शन की खोजी बनो।
  • (भजन संहिता 40:16) भी कहता है, जो लोग यहोवा को ढूंढते हैं, वे यहोवा के कारण हर्षित और आनन्दीत होंगे। इसलिए निरन्तर परमेश्वर की महिमा करते रहना चाहिए। क्योंकि मनुष्य के पास जो कुछ भी है; सबकुछ परमेश्वर का ही है। भले ही लोग अपने पास रखे हुए; चीज़ों को अपना होने का दावा करते हैं। पर यदि परमेश्वर मनुष्य का सबकुछ हर ले तो उसे क्षण भर भी नहीं लगेगा। इसलिए लोगों को धार्मिकता के मार्ग पर चलने के साथ-साथ निरन्तर प्रार्थना करके यह कहते रहना चाहिए; ” हे प्रभु अपनी कृपा दृष्टि मुझ पर हमेशा बनाए रखना। क्योंकि मैं मनुष्य होने के नाते हर पल पाप की ओर खिंचा चला जाता हूं। इसलिए मुझे क्षमा करने की कृपा करना; और मेरा साथ कभी न छोड़ना।”
  • (4) एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की पहचान

मेरे दोस्तों! रुपया कमाना जितना आसान है, प्रतिष्ठा अर्थात मान-सम्मान, इज्जत शोहरत कमाना इतना आसान नहीं है। कौन ऐसा मूर्ख है; जिसे प्रतिष्ठा नहीं चाहिए। प्रतिष्ठा तो सब कोई चाहते हैं और यह भी कि संसार में वे एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बन जाए। पर मेरे दोस्तों, हमेशा ही लोगों की सोच के विपरित घटती है। क्योंकि चुनाव करने काम परमेश्वर के हाथ में है। आज का वचन (यूहन्ना 15:16) पर प्रभु यीशु कहते हैं; कि तुमने मुझे नहीं बल्कि मैंने तुम्हें चुना और ठहराया है, की तुम फल उत्पन्न करो। फिर आगे को लिखा है कि तुम्हारा फल बना रहे।

  • भाईयों; कौन माता-पिता ऐसा चाहेगा कि उसका पुत्र आवारा बने। कोई नहीं चाहेगा है,न। इसलिए वे अच्छी परवरिश देने के साथ-साथ बचपन से ही स्कूल को भेजते हैं। ताकि बच्चे, अच्छे से पढ़ लिख कर समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति बन जाए। अर्थात डॉक्टर, इंजीनियर, टीचर या कोई भी अच्छी नौकरी करके माता-पिता का नाम रोशन करे। पर मेरे दोस्तों! लाख चाहे कोई कुछ भी कर ले; पर खुदा की मर्जी के बगैर कुछ भी ना होवे! इसका मतलब यह नहीं है; की ऊपर से परमेश्वर आकर बैठे-बिठाए ही किसी का झोली भर दे। न जी न! इसके लिए लोगों को सत्य निष्ठा पर चलकर तन, मन और लगन से अपना कर्तव्य का निर्वाह करते रहना चाहिए। क्योंकि परिश्रम के बिना कोई भी लक्ष्य हासिल करना नामुमकिन है।
  • आज का वचन में लोगों को खास करके यह समझने की कोशिश करना चाहिए; कि चाहे लोग कुछ भी कर्म करना चाहे, तो वे परमेश्वर को अपने जीवन और कर्म का मूल बना ले। तब प्रभु यीशु का कहना उस व्यक्ति के ऊपर सफल होगा और उसका फल हमेशा के लिए बना रहेगा। जैसे कि परमेश्वर ने दाऊद को ऐसा प्रतिष्ठा प्रदान किया की आज तक उसका नाम बाइबल में स्मरण किया जा रहा है। दाऊद एक भेड़ बकरी चराने वाला व्यक्ति था। परंतु परमेश्वर ने उसे चुनकर इस्राएल के सिंहासन पर बैठाया। दाऊद से पहले शाउल तथा बाद में बहुत सारे राजा भी बने; परंतु दाऊद के जैसा परमेश्वर की दृष्टि में कोई भी महान नहीं बना।
  • क्योंकि कौन क्या बनेगा, इसका चुनाव भले ही परमेश्वर करता है; परंतु सत्य न्याय और इमानदारी से चलने का काम वह मनुष्य के हाथ में छोड़ दिया है। अर्थात पहला काम परमेश्वर मनुष्य को चुनता है, और दूसरा काम मनुष्य का है; कि वह परमेश्वर की आज्ञा को मानकर उसके अनुसार चलता है; या फिर वह घमंडी बन कर परमेश्वर की आज्ञा को टालने का काम करता है। सत्य को अर्थात परमेश्वर को चुनने का मतलब फल बना रहेगा अर्थात परमेश्वर की वरदान से परिपूर्ण हो जाना। संसारिक मोह-माया पर आकर्षित होना अर्थात शैतान की काम को चुनने का मतलब अपने ऊपर से परमेश्वर की वरदान की समाप्ति होना समझ सकते हैं। जैसे कि शाऊल का आज्ञा उलंघन के बाद परमेश्वर दाऊद को चुनता है। (1 शमूएल 16) इस से यह मालूम होता है, कि प्रतिष्ठित व्यक्ति बनने के लिए परमेश्वर की आज्ञा मानकर, सत्य के मार्ग पर चलना अनिवार्य है। अन्यथा राजा शाऊल की तरह परमेश्वर की दृष्टि में प्रतिष्ठा गंवानी पड़ सकती है।
आज का वचन
आज का वचन

आज का वचन क्या है?

देखिए आजकल लोग कहीं यात्रा करने से पहले, कोई नया काम शुरू करने से पहले परमेश्वर से दिशा निर्देश पाने के लिए बाइबल खोलकर किसी एक पेज पर उंगली रखते हैं, और उस वचन को पढ़कर अपना शुभ अशूभ मुहूर्त जानने की कोशिश करते हैं, कि परमेश्वर आज का वचन के माध्यम से उनसे क्या-क्या कहना चाहता है? परन्तु मसीह लोग किसी दुसरे देवी-देवताओं को पूजने या भविष्य बताने वालों के पास जाने से अच्छा यह है, कि बाइबल पढ़ें, प्रार्थना करें और परमेश्वर को अपना जीवन-मृत्यु, वर्तमान और भविष्य के बारे में पुछें, वह वचन के माध्यम जरूर बात करेगा।

  • क्योंकि परमेश्वर को शुभ अशूभ, वर्तमान भविष्य पुछने के बजाय यदि मसीही लोग दुसरे देवी-देवताओं को पूजने वाले के पास जाकर अपना भविष्य जानने कोशिश करते हैैं, तो उन पर परमेश्वर का कोप भड़कता है। क्योंकि बाइबल के अनुसार (2 राजा 1) अध्याय में लिखा है, कि शोमरोन का राजा अहज्याह जब बिमार में था, तो उसने क्या किया की बालजबूब नाम एक देवता के पास अपने दूत भेज कर कहा, कि जाओ और बालजबूब से पुछ कर आओ की मैं इस बिमारी से बचुंगा की नहीं? इसके पश्चात परमेश्वर यहोवा का दूत तिशबी एलिय्याह से कहता है, उठो और जा कर शोमरोन के राजा के दूत से यह कहो क्या इस्राएल में कोई परमेश्वर नहीं जो तुम एक्रोन के बालजबूब देवता से पूछने जाते हो?
  • मसीह भाई-बहनों आप भी यदि इस प्रकार की काम में लिप्त हैं; तो जरा सावधान हो जाएं और परमेश्वर को क्षमा मांगे। फिर आगे को इस प्रकार की घटनाओं को न दुहराएं। क्योंकि इस प्रकार की काम से परमेश्वर का क्रोध अत्यंत भड़कता है। मेरे दोस्तों कोइ मनुष्य यदि आप से क्रोधित हो, तो उससे बचने का उपाय ढूंढ सकते हैं। परन्तु परमेश्वर से आपको कौन बचायेगा। इसलिए उससे बचने का एक ही उपाय है; पश्चाताप के साथ क्षमा प्रार्थना। क्योंकि वह करुणामय है, सच्चे पश्चाताप करने वाले को क्षमा कर देता है।

निष्कर्ष

मसीह में प्यारे भाई और बहनों मैं उम्मीद करता हूं, कि आज का वचन को पढ़ कर, आपको परमेश्वर के बारे में नई जानकारी मिली होगी। क्योंकि जब भी लोग बिस्तर से उठते हैं, तो सबसे पहले उनके सामने धन प्राप्ति की चिंता, परिवार चलाने का बोझ, भोग-विलास और संसारिक मोह-माया के आगे झुकने के लिए उन्हें मजबूर होना पड़ता है।

इसलिए वे संसारिक चीजों की खोज में लग जाते हैं। परन्तु प्रभु यीशु (मत्ती 6:33) के वचन में कहते हैं, कि सबसे पहले तुम परमेश्वर की राज्य और धर्म की खोज करो; क्योंकि यह सब चीजें तुम्हें यूं ही मिल जाएंगी। इसलिए निरन्तर परमेश्वर से प्रार्थना करते हुए; मांगे और कहें ” हे प्रभु मेरे और आपके बिच की भक्ति में बाधा उत्पन्न करने वाले हर प्रकार की चिजें और कमियों को दूर करने की कृपा करें! जिससे मैं तहेदिल से आपकी महिमा कर सकुं ‘‘। धन्यवाद।।

11 thoughts on “आज का वचन: Today and future no.1”

  1. बाइबल का वचन सच में दिल को छू गया बहुत ही खूबसूरत वचन है। जो कि जीवन में हमें अच्छे कर्म करने के लिए कह रहा है।

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